MahaShivRatri Special Kavita
लायी है ,भगवान श्री महा सदाशिव की कृपा बरसाई है ॥
सृष्टि के विकारो की समापन की घड़ी ये आयी है
ज्ञान चक्षु त्रिनेत्र की खुलने की तिथि ये आयी है ॥
मन के धुलने की बेला ये आयी है ।
शिव शिव शिव शिव करता हुआ ,मन करता प्रेम सगाई है
आयी है ये महाशिवरात्रि की पावन बेला ये आयी है ॥
आनंद का सागर है ये , अनंत का गागर है ये , आत्मा की प्यास है ये,
मन की अरदास है ये , हे ! प्रभु महासदाशिव तुझमे लीन हो जाऊ,
तेरे ध्यान में खो जाऊ, जो तेरी हो ईक्षा वैसा ढल पाउ ।
आयी है महाशिवरात्रि की पावन बेला ये आयी है.,
लायी है ,,,भगवान श्री महा सदाशिव की कृपा बरसाई है ॥
अनंत कोटि ब्रम्हांड नायक सृष्टिकर्ता
भगवान श्री महासदाशिव के चरणों में
Vivek Jaiswal Poetry
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ॐ नमः शिवाये ॐ नमः शिवाये ॐ नमः शिवाये ॐ नमः शिवाये ॐ नमः शिवाये ॐ नमः शिवाये ॐ नमः शिवाये ॐ नमः शिवाये ॐ नमः शिवाये ॐ नमः शिवाये ॐ नमः शिवाये ॐ नमः शिवाये ॐ नमः शिवाये ॐ नमः शिवाये ॐ नमः शिवाये ॐ नमः शिवाये ॐ नमः शिवाये ॐ नमः शिवाये ॐ नमः शिवाये ॐ नमः शिवाये ॐ नमः शिवाये ॐ नमः शिवाये ॐ नमः शिवाये
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