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Kavita Dedicated to Hemant

अद्भुद  विलक्षण  हेम  सा  कुंड  हो  तुम ,,  हिमालय  सा  दिल  है  तुम्हारा .. बड़े  खुशनसीब  तो  तुम ,,कभी  कभी सोच  भी  नहीं  सकते  क्या  गुल  खिला  दोगे. अद्भुद  अज़ाब  बड़े  तीरंदाज़  हो  तुम , कुछ  अलग  से  पर  सबके  सरताज  हो  तुम . जनम  दिन  की  हार्दिक  बधाइयों  के  बिच  स्वीकारो  महाशिवरात्रि  के  आशीर्वाद  को .. बड़े  खुसनसीब  ,,खुश  मिज़ाज़  हो  तुम ...

BHUT BHAWAN BHUTESHWAR BHUTHNATH BHAGWAN SAMB SADASHIV 'S POETRY

आज  की  हवाओ  में  कुछ  ताजगी  नयी  है ,प्रकृति  की  लहरों  में  डम डम  डम डम डमरू बज रही है .. कल  कल कल  कल कलरव  करती  हवाओ  में , शिव  शिव  शिव  शिव की  सुगंध  भर  रही है . भक्तिमय ! प्रभु  तेरी  कृपा  से  हर  हर  हर  हर महादेव  की  गूँज  गुंजित हो रही  है कल  कल कल  कल  कलरव  करती  हवाओ  में   शिव  शिव  शिव  शिव  की  सुगंध  भर रही  है. मन  के  मधुबन  में  सुगन्धित  शांति  की  पुष्प  की  खिली  उठी  है , आज  की  हवाओ  में  कुछ  ताजगी  नयी  है . यही  आशीर्वाद ! यही  वर  दो  प्रभु  हर  रोज  कुछ  ऐसा  करू, जिससे  तुजसे  रोज  ही  मिलु न  छूटे  कभी तेरी  यादो...

MahaShivRatri Special Kavita

आयी है महाशिवरात्रि की पावन बेला ये आयी है. लायी है ,भगवान श्री महा सदाशिव की कृपा बरसाई है ॥ सृष्टि के विकारो की समापन की घड़ी ये आयी है ज्ञान चक्षु त्रिनेत्र की खुलने की तिथि ये आयी है ॥ मन के धुलने की बेला ये आयी है । शिव शिव शिव शिव करता हुआ ,मन करता प्रेम सगाई है आयी है ये महाशिवरात्रि की पावन बेला ये आयी है ॥ आनंद का सागर है ये , अनंत का गागर है ये , आत्मा की प्यास है ये, मन की अरदास है ये , हे ! प्रभु महासदाशिव तुझमे लीन हो जाऊ, तेरे ध्यान में खो जाऊ, जो तेरी हो ईक्षा वैसा ढल पाउ । आयी है महाशिवरात्रि की पावन बेला ये आयी है., लायी है ,,,भगवान श्री महा सदाशिव की कृपा बरसाई है ॥ अनंत कोटि ब्रम्हांड नायक सृष्टिकर्ता      भगवान श्री महासदाशिव के चरणों में      Vivek Jaiswal Poetry www.facebook.com/vivekjaiswalpoetry www.hindikavitainhindi.blogspot.com                    

Kavita Didicated To BirthDay Boy Rahul Bansal

जन्नत  से  बहार  आयी  है ,, खुशियों  की  फुहार  आयी  है , आया  था  इस  दिन  को  इस  धरा  पे ,,पदार्पण  से  माँ  लहलहाइ है . राहों  में  रल  रल  के  खुशियां  हु  बिखेरता ,  कभी  शांत  कभी  नटखट  सा .. प्यार  करू  परबत  सा ,,काश  की  कोई  समझ  लेता  मुझे  मेरी  आँखों  से  टपकती  मधुरता ,,कोई  पी  लेता  भी  इसे . मेरे  रोम  रोम  से  खिलता  है  कसमकस  बड़ा .. मैं राहुल  हूँ ,,हुआ  हूँ  यु  ही  बड़ा ..